विश्व राजनय का केंद्रस्थल

आठवां विश्व हिंदी सम्मेलन का न्यूयॉर्क में आयोजन एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्व की घटना है। यह पहला अवसर है जब अमेरिका के किसी शहर में यह आयोजन किया जा रहा है। अमेरिका विश्व के उन देशों में से है जहां प्रवासी भारतीयों और भारतवंशियों की सर्वाधिक उपस्थिति है। उनमें भी, न्यूयॉर्क विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहां भारतीय मूल के लोगों ने अपनी प्रतिभा, लगन और मेहनत के बल पर अमेरिकी समाज में विशिष्ट स्थान बनाया है। अमेरिका में बसे भारतीय अपनी संस्कृति से आज भी गहराई के साथ जुड़े हुए हैं जो भारतीय त्योहारो और राष्ट्रीय पर्वों के समय वहां आयोजित होने वाले उत्सवों में स्पष्ट दिखाई देता है। भारतीय जड़ों से जुड़े रहने की आकांक्षा और भारतीय राष्ट्रभाषा के प्रति अपनत्व किसी एक पीढ़ी तक सीमित नहीं है बल्कि प्रवासी भारतीयों की नई पीढ़ियां भी अपने मूल देश की सांस्कृतिक और भाषिक धरोहर के साथ एकात्मता अनुभव करती हैं।

       

न्यूयॉर्क में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजित होना न सिर्फ अमेरिका बल्कि कनाडा तथा मैक्सिको जैसे उत्तरी अमेरिका के अन्य पड़ोसी देशों, दक्षिण अमेरिका और कैरेबियाई देशों के भारतवंशियों के लिए भी अपनी साहित्यिक, सांस्कृतिक और भाषायी विरासत के साथ जुड़ने, हिंदी में रुचि तथा आस्था रखने वाले अन्य समर्पित लोगों से मिलने, हिंदी और भारतीयता से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखने, आधुनिक भारत में भाषायी स्तर पर हो रहे परिवर्तनों को समझने और वैश्विक स्तर पर हिंदी की भूमिका को परखने-समझने का यादगार अवसर है। न्यूयॉर्क में सक्रिय हिंदी-उन्मुख और भारतोन्मुख संस्थाओं के लिए भी यह सम्मेलन हमेशा के लिए सहेजने वाली यादें लेकर आएगा।

अमेरिकी धरती पर पहली बार

अमेरिका के किसी अन्य शहर की अपेक्षा न्यूयॉर्क में इस सम्मेलन का आयोजन कुछ अन्य महत्वपूर्ण कारकों की ओर भी इंगित करता है। संयुक्त राष्ट्र न्यूयॉर्क में ही स्थित है और विश्व की हर महत्वपूर्ण, समृद्ध और विकासमान भाषा की भांति हिंदी भी इस विश्व संस्था में स्थान पाने की आकांक्षी है। नागपुर में हुए पहले सम्मेलन के समय से ही हिंदी विद्वान, मनीषी, पत्रकार और राजनेता इस बात पर जोर देते रहे हैं कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया जाना चाहिए।  

     

सूरीनाम में हुए पिछले विश्व हिंदी सम्मेलन में पहला संकल्प ही यही लिया गया था कि लगभग 132 देशों में 80 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने की पहल की जाए। संयुक्त राष्ट्र के शहर में इस सम्मेलन के आयोजन से हिंदी अपने लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाएगी। संयोगवश, आठवें विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन तेरह जुलाई को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय परिसर में ही होने जा रहा है।

अमेरिका का न्यूयॉर्क शहर वास्तविक अर्थों में बहु-सांस्कृतिक समाज का प्रतिनिधित्व करता है। यहां विभिन्न भाषा-भाषियों के बीच अनोखे समन्वय वाला शहर है। वहां इस आयोजन से हिंदी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी जिसका प्रभाव न सिर्फ अमेरिका के अन्य भागों में, बल्कि विश्व भर में परिलक्षित होगा। न्यूयॉर्क एक आधुनिक शहर है और हिंदी भी आधुनिकता के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही है। न्यूयॉर्क दृढ़ संकल्प और मजबूती का भी प्रतीक है। हिंदी भी इसी तरह की दृढ़ता से आगे बढ़ रही है। आशा की जानी चाहिए कि विश्व राजनय के केंद्रस्थल न्यूयॉर्क में होने वाला यह हिंदीमय आयोजन इस भाषा की विकास यात्रा में मील का पत्थर सिद्ध होगा।


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