मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि आठवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन 13-15 जुलाई 2007 को न्यूयॉर्क में आयोजित किया जा रहा है। 1975 में आरंभ की गई विश्व हिंदी सम्मेलनों की यह परम्परा हिंदी की वैश्विक यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव है जिनमें हिंदी के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जाता है और भावी दिशा निर्धारित की जाती है।
हिंदी का महत्व केवल इसलिए नहीं है कि यह देश के एक बड़े भू-भाग में बोली जाती है, बल्कि इसलिए भी है कि इसमें अन्य सभी भाषाओं को अपने अंदर समाहित करने की उदारता है। पहले तीन विश्व हिंदी सम्मेलनों का बोध वाक्य 'वसुधैव कुटुम्बकम'था जो भारतीय दर्शन को परिभाषित करता है और यही हिंदी भाषा की विशेषता भी है। अपनी इसी विशेषता के कारण यह विदेशों में भी मान्यता प्राप्त कर रही है और हिंदी में रुचि रखने वाले लोगों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।
मुझे आशा है कि न्यूयॉर्क में आयोजित किया जाने वाला आठवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन इस भावना को पुनः परिलक्षित करने में सफल होगा।
सम्मेलन की सफलता के लिए मेरी शुभकामनाएं।

(प्रणब मुखर्जी)