सम्मेलन का बोधवाक्य था- वसुधैव कुटुम्बकम। इस सम्मेलन में भारत
से तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार नियोजन मंत्री डॉ. कर्ण सिंह के नेतृत्व
में 23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। सम्मेलन में 17 देशों के 181 प्रतिनिधियों
ने हिस्सा लिया।
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विमान से उतरते भारतीय दल के सदस्य
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मॉरीशस की धरती पर भारतीय दल। श्री यशपाल जैन, डॉ. कामिल बुल्के, श्री विमल मित्र |
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सम्मेलन का उद्घाटन करते मॉरीशस के प्रधानमंत्री सर शिवसागर रामगुलाम |
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सर शिवसागर रामगुलाम का उद्घाटन भाषण |
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सर रामगुलाम और डॉ. कर्ण सिंह |
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मॉरीशस सरकार द्वारा जारी डाकटिकट |
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उद्घाटन समारोह
सम्मेलन का उद्घाटन 28 अगस्त 1976 को हुआ। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता डॉ. कर्ण सिंह
ने की जबकि मॉरीशस के युवा एवं क्रीड़ा मंत्री श्री दयानंद बसंतराय ने स्वागत भाषण
दिया।
इस अवसर पर विचार प्रकट करने वाले एक अन्य प्रमुख वक्ता थे श्री अनंत गोपाल शेवड़े
जो कि प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन के महासचिव रहे थे। मॉरीशस के शिक्षा एवं संस्कृति
मंत्री डॉ. रेजिस शापरों ने सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों के प्रति आभार जताया।
समापन समारोह
दूसरे विश्व हिंदी सम्मेलन का समापन समारोह तीस अगस्त 1976 को हुआ जिसकी अध्यक्षता
डॉ. कर्ण सिंह ने की। समारोह को जिन अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया उनमें डॉ. निकोल
बलबीर (फ्रांस), डॉ. लोथार लुत्से, जर्मनी, फादर कामिल बुल्के, श्री अमृतलाल नागर और
मॉरीशस के युवा एवं क्रीड़ा मंत्री श्री दयानंद बसंतराय शामिल थे।
मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. सर शिवसागर रामगुलाम ने आभार अभिव्यक्त किया।
शैक्षिक सत्र
सम्मेलन के दौरान चार विषयों पर परिसंवाद (पूर्ण सत्र) आयोजित किए गए। ये विषय थे-
- हिंदी की अंतरराष्ट्रीय स्थिति, शैली और स्वरूप
- जनसंचार के साधन और हिंदी
- हिंदी के प्रचार में स्वैच्छिक संस्थाओं की भूमिका
- विश्व में हिंदी के पठन पाठन की समस्या
प्रदर्शनी
सम्मेलन में एक पुस्तक प्रदर्शनी और एक चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। सम्मेलन के बाद पुस्तक
प्रदर्शनी में प्रदर्शित सभी पुस्तकें महात्मा गांधी संस्थान को भेंट कर दी गईं।
अन्य विशेषताएं
दूसरे विश्व हिंदी सम्मेलन के अवसर पर मॉरीशस में तीन डाक टिकट जारी किए गए। इकत्तीस
अगस्त 1976 को पोर्ट लुई में प्रारंभिक भारतीय आप्रवासियों की स्मृति में एक भव्य कार्यक्रम
का आयोजन किया गया।
इमीग्रेशन स्क्वेयर, पोर्ट लुई में 31 अगस्त 1976 को डॉ. कर्ण सिंह
द्वारा सनातन धर्म मंदिर का शिलान्यास किया गया। सम्मेलन के अवसर पर नागरी प्रचारिणी
सभा द्वारा प्रकाशित तुलसी ग्रंथावली के तृतीय खंड का लोकार्पण भी किया गया।
तीस अगस्त
को मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. सर शिवसागर रामगुलाम द्वारा बोबासें में त्रिवेणी भवन
का उद्घाटन किया गया।