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जो कहा गया, वह हुआ भी
पारामारिबो (सूरीनाम) में 5-9 जून 2003 को आयोजित सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन में पारित
मंतव्यों पर की गई कार्रवाई का विवरण-
1. संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने का संकल्प
अनुवर्ती कार्रवाईः संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को आधिकारिक भाषा
के रूप में शामिल किए जाने की दिशा में विदेश मंत्रालय निरंतर प्रयत्नशील है। इस विषय के महत्व को देखते
हुए विदेश मत्री, विदेश राज्यमंत्री और अपर सचिव (प्रशासन) की अध्यक्षता में गठित विभिन्न समितियों
की बैठकों में इस संबंध में समय-समय पर गहन विचार-विमर्श किया गया जिसके परिणामस्वरूप विदेशों
में हिंदी भाषा के पक्ष में एक अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए एक पक्ष समर्थन दस्तावेज तैयार करवाया गया है। इस संबंध में आगे कार्रवाई की जा रही है।
2. विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पीठों की स्थापना और हिंदी शिक्षण संबंधी अन्य
कार्य।
अनुवर्ती कार्रवाईः विदेशों में विभिन्न विश्वविद्यालयों में भारतीय विद्या की कुल
19 पीठें स्थापित की गई हैं जिनमें 12 हिंदी पीठें हैं। पांच अन्य पीठें स्थापीत करने
का प्रस्ताव है।
विदेशों में हिंदी शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए भी संबंधित देशों की आवश्यकता के अनुसार
कार्रवाई की जाती है। हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, यूक्रेन,
रूस, उज्बेकिस्तान, सूरीनाम, गुयाना आदि देशों में हिंदी शिक्षण के लिए हर संभव
सहायता प्रदान की जा रही है जिनमें हिंदी पाठ्य पुस्तकों को तैयार करने, हिंदी शिक्षण
के लिए कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर, सीडी आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना शामिल है। विभिन्न देशों
में स्थानीय विश्वविद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थाओं के सहयोग से स्थानीय हिंदी सम्मेलन
भी आयोजित किए जाते हैं जिनमें संबंधित देश में हिंदी शिक्षण से संबंधित समस्याओं पर
विचार किया जाता है।
3. हिंदी भाषा और साहित्य का प्रचार-प्रसार, हिंदी शिक्षण संस्थाओं के बीच संबंध तथा
भारतीय मूल के लोगों में हिंदी के प्रयोग का प्रचार।
अनुवर्ती कार्रवाईः विदेशों में हिंदी भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य
से क्षेत्रीय हिंदी सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं जो संबंधित देश के हिंदी विद्वानों,
शिक्षकों, साहित्यकारों, छात्रों को उपयुक्त मंच उपलब्ध कराते हैं। विदेशों में प्रकाशित अनेक पत्रिकाओं को भी मंत्रालय द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है।
4. हिंदी के प्रचार हेतु वेबसाइट की स्थापना और सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग
अनुवर्ती कार्रवाईः सातवें विश्व हिंदी सम्मेलन के दौरान एक वेबसाइट का निर्माण किया
गया था। आठवें विश्व हिंदी सम्मेलन के लिए एक विस्तृत वेबसाइट अलग से तैयार
की गई है।
सूचना प्रौद्योगिकी का उत्तरोत्तर प्रयोग करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विदेश
स्थित सभी राजदूतावासों के माध्यम से विदेशों में विभिन्न विश्वविद्यालयों, शैक्षिक
संस्थाओं आदि को हिंदी के सॉफ्टवेयर, कम्प्यूटर आदि उपलब्ध कराए गए हैं और यह प्रक्रिया
जारी है। अगस्त 2006 में विदेश मंत्रालय की वेबसाइट हिंदी में तैयार की गई। यह वेबसाइट
यूनिकोड आधारित है जो एक आधुनिकतम एनकोडिंग मानक है।
5. हिंदी विद्वानों की एक विश्व निर्देशिका का प्रकाशन।
अनुवर्ती कार्रवाईः भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा इस संबंध में कार्रवाई की
जा रही है। परिषद द्वारा अधिकांश सामग्री एकत्रित की जा चुकी है और यह निर्देशिका शीघ्र
ही प्रकाशित होने की संभावना है।
6. विश्व हिंदी दिवस मनाया जाना।
अनुवर्ती कार्रवाईः विदेश मंत्रालय द्वारा तथा मंत्रालय के निर्देशानुसार विदेश स्थित
भारत के अनेक राजदूतावासों/उच्चायोगों द्वारा दस जनवरी 2006 को पहली बार 'हिंदी दिवस'
के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर हिंदी की विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। दस
जनवरी 2007 को विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर विदेश मंत्रालय द्वारा भारत में हिंदी पढ़ने
वाले विदेशी छात्रों के लिए हिंदी प्रतियोगिता आयोजित की गई और विजेता छात्रों को दस
जनवरी 2007 को आयोजित भव्य समारोह में मुख्य अतिथि माननीय विदेश राज्यमंत्री श्री आनंद
शर्मा द्वारा पुरस्कृत किया गया। विदश स्थित भारत के राजदूतावासों/उच्चायोगों ने भी
बड़े पैमाने पर विश्व हिंदी दिवस के आयोजन किए। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताएं एवं
सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किए गए। विश्व हिंदी दिवस प्रत्येक वर्ष विधिवत मनाए जाने
की योजना है।
7. कैरेबियाई हिंदी परिषद की स्थापना।
अनुवर्ती कार्रवाईः इस संबंध में मंत्रालय द्वारा समुचित रूप से विचार किया गया और
यह पाया गया कि कैरेबियाई देशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार की वर्तमान व्यवस्था पर्याप्त
है।
8. दक्षिण भारत के 10 विश्वविद्यालयों में हिंदी विभागों की स्थापना।
अनुवर्ती कार्रवाईः यह प्रस्ताव विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विचारार्थ भेजा गया है।
9. भारत में एम.ए. हिंदी के पाठ्यक्रम में विदेशों में रचित हिंदी लेखन को समुचित स्थान
दिलाना।
अनुवर्ती कार्रवाईः यह विषय भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विचारार्थ भेजा गया है।
10. सूरीनाम में हिंदी शिक्षण का संवर्धन
अनुवर्ती कार्रवाईः सूरीनाम में हिंदी शिक्षण को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रालय हर
संभव सहायता प्रदान कर रहा है। बड़ी संख्या में हिंदी की पाठ्य पुस्तकें, शब्दकोष,
हिंदी शिक्षण सीडी आदि भेजे गए हैं। भारतीय राजदूतावास, भारतीय सांस्कृतिक केंद्र एवं
स्थानीय शिक्षकों के सहयोग से हिंदी की पाठ्य पुस्तकें भी तैयार करवा रहा है। इसके
अतिरिक्त सूरीनाम में विभिन्न स्थानों पर हिंदी की कक्षाएं चलाई जा रही हैं। ये कार्य
विदेश मंत्रालय के वित्तीय समर्थन से किए जा रहे हैं।
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कॉपीराइट © 2007: विदेश मंत्रालय, भारत सरकार
हिंदी अनुभाग, कमरा नंबर 235 एल, साउथ ब्लॉक, विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली- 110 011
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